वहदत-ए-इस्लामी हिंद, पुणे द्वारा “पैग़ाम-ए-रहमत-ए-आलम ﷺ” के अंतर्गत तकरीरी मुकाबले और तकसीम ए इमामत


वहदत-ए-इस्लामी हिंद, पुणे द्वारा “पैग़ाम-ए-रहमत-ए-आलम ﷺ” के अंतर्गत तकरीरी मुकाबले और तकसीम ए इमामत

पुणे:( मुहम्मद जावेद मौला)

वहदत-ए-इस्लामी हिंद, पुणे द्वारा रविवार, 30 अगस्त 2026 को देशव्यापी अभियान “पैग़ाम-ए-रहमत-ए-आलम ﷺ” के अंतर्गत इंटर स्कूल तकरीरी मुकाबले और तकसीम ए इमामत का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में समाज, देश और पूरी दुनिया के सामने मौजूद चार प्रमुख सामाजिक एवं पर्यावरणीय समस्याओं को उजागर किया गया: कन्या भ्रूण हत्या, बढ़ते आत्महत्या के मामले, नशे की लत और पर्यावरणीय विनाश।

भाषण प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को इन गंभीर समस्याओं पर अपने विचार व्यक्त करने तथा समाज में जागरूकता पैदा करने का अवसर प्रदान किया गया। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने इन चारों विषयों पर भाषण प्रस्तुत किए और उनके कारणों, दुष्परिणामों तथा संभावित समाधानों पर प्रकाश डाला।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं उपहार प्रदान किए गए, जबकि सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को उनकी भागीदारी और प्रयासों के सम्मान में प्रमाण-पत्र एवं ट्रॉफियां प्रदान की गईं।इस मौके पर वहदत-ए-इस्लामी हिंद के ऑल इंडिया अध्यक्ष ज़ियाउद्दीन सिद्दीकी ने शिक्षा, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदार नागरिकता के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कन्या भ्रूण हत्या के विषय पर उन्होंने कहा कि लिंग के आधार पर गर्भस्थ शिशु का चयन पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने विभिन्न अनुमानों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर में हर वर्ष लगभग 14 लाख लड़कियों का जन्म लिंग-आधारित गर्भपूर्व चयन के कारण नहीं हो पाता, जबकि भारत भी लिंग-आधारित गर्भपात की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा कि केवल कानूनों के माध्यम से इस बुराई को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि सामाजिक एवं नैतिक परिवर्तन भी आवश्यक है। इस्लामी शिक्षाओं और पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ के जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम बेटियों और महिलाओं के साथ अन्याय की कड़ी निंदा करता है तथा प्रत्येक बच्चे के जीवन का सम्मान एवं संरक्षण करने की शिक्षा देता है।

नशीली दवाओं एवं शराब की लत के संबंध में सिद्दीकी ने इसे एक गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि नशे की लत बलात्कार, हत्या, डकैती तथा अन्य प्रकार की हिंसा सहित विभिन्न अपराधों में एक महत्वपूर्ण योगदानकारी कारक बन सकती है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों या शराब का सेवन करने वाले कुछ व्यक्ति आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, जबकि नशे की लत पारिवारिक विघटन, सामाजिक समस्याओं और गंभीर स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों का भी कारण बनती है।

उन्होंने शराब और नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे लिवर की बीमारियां, लिवर कैंसर, मुंह का कैंसर और अन्य गंभीर रोगों, की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को नशे से बचाने के लिए जनजागरूकता, नशा-निवारण संबंधी शिक्षा, काउंसलिंग तथा पुनर्वास सहायता को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने परिवारों, विद्यालयों, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और सरकारी एजेंसियों से मिलकर नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयास करने तथा नशे से प्रभावित लोगों को उचित सहायता और पुनर्वास उपलब्ध कराने की अपील की।

बढ़ते आत्महत्या के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए सिद्दीकी ने वैश्विक स्थिति की गंभीरता को उजागर किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर वर्ष 7 लाख से अधिक लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं।

उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए सहानुभूति, सामाजिक सहयोग, जिम्मेदार व्यवहार, समय पर हस्तक्षेप और ऐसा वातावरण आवश्यक है, जिसमें कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे लोग बिना भय या संकोच के सहायता प्राप्त कर सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि विद्यालयों और समाज में आशा, सहानुभूति, आपसी सहयोग और सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा दिया जाए।

पर्यावरणीय विनाश के विषय पर सिद्दीकी ने कहा कि मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित किया है। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, वनों की कटाई और पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश आज पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्व के नेता प्रत्येक वर्ष अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में पर्यावरणीय समस्याओं पर चर्चा करते हैं और विभिन्न प्रतिबद्धताएं व्यक्त करते हैं, लेकिन इस संकट से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर व्यावहारिक कदम और प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है।

पैगंबर मुहम्मद ﷺ की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने वृक्षारोपण एवं प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने उस प्रसिद्ध हदीस का उल्लेख किया कि यदि कयामत आने लगे और किसी व्यक्ति के हाथ में पौधा हो तथा वह उसे लगा सकता हो, तो उसे पौधा लगा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा में यह महत्वपूर्ण संदेश है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी रचनात्मक और लाभकारी कार्य को नहीं छोड़ना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों एवं नागरिकों से वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण की रोकथाम और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।इलियास मोमिन ने सभी सम्मानित हस्तियों, शिक्षाविदों, शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों, अतिथियों एवं पुणे के सभी शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों एवं समाज से मिलकर एक संवेदनशील, जिम्मेदार, नशामुक्त, पर्यावरण-सचेत और नैतिक रूप से मजबूत समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील के साथ हुआ।


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