अदब-ए-अतफाल का रौशन सितारा डूब गया


अदब-ए-अतफाल का रौशन सितारा डूब गया

          ◼️ इज़हारे ग़म ◼️

मुंबई : उर्दू अदब, खासकर बच्चों के साहित्य और जहनी परवरिश के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले मशहूर साहित्यकार, इंडियन यूथ एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष, उर्दू टाइम्स के पूर्व मुदीर तथा माहनामा गुल बूटे के एडिटर जनाब Farooq Ghulam Nabi Sayyed Khan उर्फ “फारूक सय्यद” अब हम में नहीं रहे। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे फारूक सय्यद साहब का इंतकाल हो गया। उनकी तदफीन मुंबई में ही की जाएगी।

फारूक सय्यद साहब ने बच्चों के अदब को नई दिशा देने और उर्दू भाषा की खिदमत में अहम भूमिका निभाई। उनकी शख्सियत में नरमी, मोहब्बत, इल्म और अपनापन साफ झलकता था। अपने उस्तादों से मोहब्बत, दोस्तों से बेपनाह लगाव और हर मिलने वाले से गर्मजोशी से पेश आना उनकी पहचान थी।

उनके मीठे बोल, सादा मिजाज और दोस्तों की गैरमौजूदगी को महसूस करने की आदत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी। उर्दू अदब के इस मुजाहिद के इंतकाल से साहित्यिक जगत में गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है।

अल्लाह तआला मरहूम को करवट करवट जन्नत नसीब फरमाए और उनके अहले खाना को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

आसमां तेरी लहद पर शबनम अफशानी करे…

— अय्यूब अहमद नत्लामंदू

एडिटर : कासिद, सोलापुर


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