“मानवता, नैतिकता और सामूहिक प्रगति के मूल्यों को शिक्षा व उद्योग जगत को मिलकर आगे बढ़ाना होगा” — प्रा. डॉ. विलास आढाव
पुणे | “मानवता, नैतिकता और सामूहिक प्रगति के मूल्यों को शिक्षा और उद्योग जगत को साथ मिलकर आगे बढ़ाना होगा।” यह विचार प्रा. डॉ. विलास आढाव, संचालक – आजीवन शिक्षा एवं विस्तार विभाग, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, ने अपने विचारोत्तेजक बीज-भाषण में व्यक्त करते हुए शिक्षा–उद्योग–अर्थव्यवस्था के त्रिसूत्री संबंध का महत्व रेखांकित किया।
वे फाउंडेशन फ़ॉर एजुकेशन एंड कम्युनिटी वेलफ़ेयर, महाराष्ट्र राज्य द्वारा आयोजित “शिक्षा–उद्योग–अर्थव्यवस्था : सहप्रगति का सेतु” इस राज्य स्तरीय परिसंवाद के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर डॉ. रामदास मारणे, राष्ट्रीय युवा पुरस्कार (भारत सरकार) प्राप्त, अध्यक्ष – राष्ट्रीय युवा पुरस्कारार्थी, भारत सरकार व अध्यक्ष – ग्रीनगार्ड फाउंडेशन आणि ॲडव्होकेट मुकुंद सोनवणे, नोटरी व सचिव – माइनॉरिटी एजुकेशनल इन्स्टिट्यूशन्स डेव्हलपमेंट असोसिएशन, डॉ. तबस्सुम आरिफ पानसरे, प्राध्यापक आणि विभाग प्रमुख ,द्रव्यगुण विज्ञान विभाग, शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, बारामती, सामाजिक कार्यकर्त्या डॉ. मीना गायकवाड वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता प्रमुख अतिथियों में शामिल थे.
यह प्रभावी राज्यस्तरीय परिसंवाद एवं गौरव समारंभ 2025 मराठा चेंबर ऑफ कॉमर्स पुणे के लकाकी हॉल में उत्साहपूर्ण और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा, उद्योग, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, उद्यमशीलता तथा विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक मान्यवर एवं राज्यभर से आए विशिष्ट व्यक्तित्व बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


























